Latest Post

6/recent/ticker-posts

GST IN HINDI, GST EXPLAINED, ADVANTAGES OF GST, GST MEANS


हैलो दोस्तों आज कि मेरी इस पोस्ट के माध्यम से आप जानेगें कि
What Is GST? After The Implementation of GST, What Impact Did The Country's Tax Have On? How Many Types Of Tax Was To Be Paid Before GST? What Is Direct Tax and Indirect Tax? Why Do GST? तो मेरी इस पोस्ट को पढ़े और इसमें कोई सुधार की आवश्यकता हो तो मुझे ज़रूर कमेंट कर सूचित करें ताकि मैं उसे सही कर सकूँ और GST के बारे में कुछ और जानना चाहते है तो वह भी लिखें मैं कोशिश करुंगा कि वह भी मैं अपनी अगली पोस्ट में प्रकाशित करूं।

GST IN HINDI, GST EXPLAINED, ADVANTAGES OF GST, GST MEANS


GST in Hindi
GST in Hindi – Goods and Service Tax (GST) एक Indirect Tax है। जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगेगा। जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है जिसने भारत में कई अप्रत्यक्ष करों को बदल दिया है। माल और सेवा कर अधिनियम 29 मार्च 2017 को संसद में पारित किया गया था। यह अधिनियम 1 जुलाई 2017 को पूरे भारत में प्रभावी हुआ ।

सरल शब्दों मेंगुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया गया एक अप्रत्यक्ष कर है। इस कानून ने कई अप्रत्यक्ष कर क़ानूनों को बदल दिया है जो पहले भारत में मौजूद थे।

जीएसटी पूरे देश के लिए एक अप्रत्यक्ष कर है।  जीएसटी वस्तुओं और सेवाओं की खपत पर आधारित कर है।

उदाहरण के लिए यदि आप किसी Five Star Hotel में बैठ कर चाय पिऐंगेतो आपको उस चाय के लिए Service Tax  Pay करना होगा क्‍योंकि आप एक Hotel के अन्‍दर बैठ कर चाय पी रहे हैं यानी Hotel की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यदि आप Five Star Hotel में बैठकर भी वही चाय बाहर के ठेले से मंगाकर पीते हैंतो उस स्थिति में आपको उस चाय पर कोई Service Tax Pay नहीं करना पड़ेगा हालांकि यदि Hotel वाले आपको अपने Hotel में बैठने के लिए Charge करते हैंतो उस बैठने की सुविधा का उपयोग करने के ब‍दले में किए जाने वाले भुगतान पर आपको Service Tax देना पडेगा।


GST लागू होने के बाद पूरा .देश एक Single Combined Market में बदल गया है और ज्यादातर Indirect Tax जैसे Central Excise Tax, Service Tax, Vat, Entertainment Tax, Luxury Tax, Lottery Tax आदि सभी GST में समाहित हो गए हैं। जिसके परिणामस्‍वरूप अब पूरे भारत में किसी भी सामान (Goods) या सेवा (Service) पर एक जैसा Tax लगेगा और पूरे देश में किसी एक सामान की कीमत एक ही रहेगी।

GST से पहले केंद्र सरकार व राज्‍य सरकार दोनों अपनी आमदनी के लिए समय-समय पर नए-नए तरह के Tax लगा सकते थे। इसी वजह से जब से देश आज़ाद हुआतब से लेकर GST Launch होने तककुल 7 तरह के Indirect Tax Central Government द्वारा तथा 8 तरह के Indirect Tax State Government द्वारा लगाया जा रहा था। यानी किसी भी Goods or Service पर कुल 15 तरह के Indirect Taxes Apply होते थे और अलग-अलग राज्‍यों के Indirect Taxes की दर अलग-अलग होने की वजह से एक ही सामान की कीमत देश के अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग हुआ करती थी।

इस पुराने Taxation System का नाजायज फायदा व्‍यापारी लोग Tax बचाने के लिए उठाते थे। वे सामान किसी ऐसे State से लेते थेजिसका Tax ज्‍यादा होता था और ऐसे राज्‍य का Bill कटवाते थेजिसका Tax कम था। परिणामस्‍वरूप बीच के Tax Gap को डकार जाते थे और व्‍यापारियों के इस तरह के Tax बचाने की प्रक्रिया को Identify करना किसी भी स्थिति में सम्‍भव नहीं था। लेकिन GST के बाद सभी जगह एक जैसा Tax होने की वजह से व्‍यापारी लोग इस तरीके से Tax नहीं बचा सकेंगे।

क्‍योंकि जो लोग इस तरह की Tax Savings करने के कारण Tax Payer होकर Return File करने से बच जाते थेअब उन्‍हें भी Legal तरीके से Return File करना होगा और Tax Payer बनना ही पडेगा। परिणामस्‍वरूप सरकार के पास वास्‍तव में ज्‍यादा Tax पहुँचेगा जिससे देश की अर्थव्‍यवस्‍था (GDP) में अगले 2 से 3 सालों में कम से कम 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि होगी जो कि वर्तमान में लगभग 7% के आसपास है।

अक्‍सर लोग ये नहीं समझ पाते कि GDP Growth से देश के आम नागरिक को क्‍या फायदा होता हैवास्‍तव में GDP Growth, Inflation Adjusted होता है। यानी यदि देश की GDP Growth 7%  Inflation Rate (महँगाई दर) 5% हैतो इसका मतलब ये है कि दुनियाँ के संदर्भ में देश की विकास दर 7+5 = 12% सालाना है। ऐसे में यदि देश की GDP 3% बढ़ जाए Inflation Rate 5% ही रहेतब भी दुनियाँ के संदर्भ में देश की विकास दर 10 + 5 = 15% Yearly हो जाएगी और यदि 10 सालों तक देश की अर्थव्‍यवस्‍था इसी 15% Yearly की दर से बढ़ती रहेतो Compounding Effect के कारण हमारे देश की अर्थव्‍यवस्‍था जो कि वर्तमान में लगभग 3 Trillion Dollars की है, 10 साल बाद लगभग 13 Trillion Dollars की हो जाएगीजो कि USA की लगभग वर्तमान की अर्थव्‍यवस्‍था है।

GST IN HINDI, GST EXPLAINED, ADVANTAGES OF GST, GST MEANS

यानी 10 साल बाद भारतआज के अमेरिका जितनी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन सकता है और जब भारतआज के अमेरिका जितनी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगातो आप समझ ही सकते हैं कि आज का भारत कैसा दिखाई देगा। फिर किसी भारतीय को अमेरिका के H1B Visa की जरूरत नहीं होगी क्‍योंकि अमेरिका के Dollar व भारत के रुपया में कोई अन्‍तर नहीं रह जाएगाजो कि वर्तमान में लगभग 65 गुना का अन्‍तर है परिणामस्‍वरूप ज्‍यादा पैसे कमाने के लिए अमेरिका जाने का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।

इसीलिए, GST का इतना ज्‍यादा शोर है। जबकि GST वास्‍तव में एक Tax है जो जनता को वहन करना होगा। यानी जनता पर बोझ बढने वाला हैफिर भी इसे इतने जोर-शोर से Promote किया जा रहा है। जिसका मूल कारण यही है कि इस GST की वजह से अगले कुछ सालों में देश की अर्थव्‍यवस्‍था में जबरदस्‍त सुधार हो सकता है।

GST से पहले तक केन्‍द्र व राज्‍य सरकारों द्वारा कुल 15 तरह के Indirect Tax तो लगते ही थेसाथ ही हर छोटे-मोटे नए Change को Apply करने के लिए भी राज्‍य व केंद्र सरकारें समय-समय पर CESS के नाम पर कुछ और तरह के Taxes लगाती रही हैं। उदाहरण के लिए स्‍वच्‍छ भारत अभियान एक प्रकार का CESS हैजिसे Service Tax के साथ 2014 से यानी पिछले सालों से Indirect Tax के रूप में हम Pay करते आ रहे हैं।

BEFORE GST  TAXES

40 तरह के Indirect Taxes से मुक्ति मिल गई हैइसका मतलब ये नहीं है कि अब हमें ये Tax नहीं भरने पडेंगे। वास्‍तव में इसका केवल इतना ही मतलब है कि अब हमें 40 अलग तरह के Indirect Tax Pay नहीं करने होंगे बल्कि इन सभी 40 तरह के Taxes को GST के रूप में एक Single Tax की तरह ही Pay करना होगा जिससे Account Manage करना आसान हो जाएगा।

साथ ही GST को Handle करने के लिए Digital Technology यानी Computerized System का इस्‍तेमाल किया जा रहा है जो कि पूरी दुनियाँ में सबसे पहली बार किया जा रहा है। इसके तहत Invoice Matching का काम Computer System द्वारा किया जाएगाजिससे कोई व्‍यापारी गलत Invoicing करके Cheating करते हुए Tax नहीं बचासकता। सामान्‍य बोलचाल की भाषा में कहें तो कच्‍चा बिल बनाकर गलत Entries नहीं दिखा सकता।

Invoice Matching System के अन्‍तर्गत होगा ये कि जब भी कोई व्‍यापारी कोई सामान बेचेगाउसे अपने भी Sales के Records की Entry हर महीने GST System के अन्‍तर्गत करनी होगी जो कि उसके GST ID के साथ Record होगा। साथ ही उसने जिस दूसरे व्‍यापारी को सामान बेचा हैउसका भी GST ID Record होगा। यानी System को ये पता रहेगा कि किस GST ID वाले व्‍यापारी ने किस दूसरे GST ID वाले व्‍यापारी को कौन सा सामान किस दर पर और कितनी Quantity में बेचा है।

अब जब वह दूसरा व्‍यापारी उस पहले व्‍यापारी से खरीदे गए सामान को Consumers को Sale करेगातो फिर उसे भी उसी GST System में अपने सभी Sales Records की Entry करनी पड़ेगी और क्‍योंकि System को पहले से ही पता है कि उस दूसरे व्‍यापारी ने किस पहले व्‍यापारी से कौन सा सामान कितनी Quantity में ख़रीदा हैइसलिए ये दूसरा व्‍यापानी न तो ज्‍यादा सामान बेचने की Entry कर सकता है न कम।

उदाहरण के लिए व्‍यापारी ने व्‍यापारी को 10 Mobile Phones बेचे तो उसकी Sales Record में के Reference में केवल 10 Mobile Phones की ही Entry होगी। अब जब व्‍यापारी अपने Sales Record की Entry करेगातो वो अधिकतम 10 Mobile Phones के Sale होने की ही Entry कर सकता है। अगर वो 11 Mobile Phones Sale होने की Entry करेगातो System उससे पूछेगा कि 11वां Mobile Phone उसने किससे खरीदा है ताकि वह उस 11वें Mobile Phone के Seller से Record Matching कर सके। अगर व्‍यापारी उसे 11वें Mobile Phone के Record की जानकारी नहीं दे सकतातो इसका मतलब यही है कि उसने वह Mobile बिना Bill के ख़रीदा है। यानी उसने गैर कानूनी काम किया हैजिसके लिए उसे जुर्माना व सजा भी हो सकती है।

इस Record Matching Process की वजह से ही अब किसी व्‍यापारी का आसानी से Tax चोरी करना सम्‍भव ही नहीं है। जिसके परिणामस्‍वरूप वे काला धन इकट्ठा नहीं कर सकते क्‍योंकि सरकार ने पहले ही ये कानून बना दिया है कि 2 लाख से ज्‍यादा कोई भी व्‍यक्ति अपने घर में Cash नहीं रख सकता। अपने पास 2 लाख से ज्‍यादा कश रखना भी गैर कानूनी है। तो इस तरह से या तो उस दूसरे व्‍यापारी को बताना होगा कि वो 11वां Mobile उसने किससे ख़रीदा या फिर वह उस 11वें Mobile की Selling को Show नहीं कर सकता। और जिस Product की Selling को व्‍यापारी Show ही नहीं कर सकताउससे होने वाली आय को वो Use भी नहीं कर सकता।

क्‍योंकि Undeclared Money से अगर वो कोई सामान खरीदे गातो उसे 50 हजार से ज्‍यादा के सामान को खरीदने पर अपना PAN Card देना होगा और PAN Card की Information से सरकार द्वारा आसानी से पता लगा लिया जाएगा कि उस Particular व्‍यापारी की कुल Declared Income कितनी है और उसने खर्च कितना किया है। अगर उसकी Income  Expense में Difference होगातो वो तुरन्‍त पकड़ में आ जाएगा। तो बहुत सारे लोग जो कि GST का विरोध कर रहे हैंवास्‍तव में वे इसी वजह से विरोध कर रहे हैं। क्‍योंकि उन्‍हें पता है कि वे अब Tax चोरी कर नहीं पाएंगे और अगर करेंगेतो निश्चित रूप से पकडे जाऐंगे।
GST IN HINDI, GST EXPLAINED, ADVANTAGES OF GST, GST MEANS

GST से एक फायदा ये भी हो रहा है कि अब Tax पर Tax नहीं लगेगा जो कि पहले लगा करता था। वास्‍तव में हमारे देश में शुरू से ही ऐसा Taxation System बनाने की परिकल्‍पना थी जिसमें किसी भी चीज पर केवल एक ही बार Tax Pay करना पड़े। लेकिन केंद्र व राज्‍य दोनों अलग सरकारों द्वारा अलग-अलग तरह के Tax Apply करने की वजह से कई बार एक वस्‍तु पर Tax Pay कर दिए जाने के बाद किसी दूसरे राज्‍य में उस वस्‍तु पर फिर से Tax लगा दिया जाता थाजिससे एक ही सामान की दो राज्‍यों में दो अलग कीमत हो जाती थी। GST की वजह से पूरे देश में हर वस्‍तु पर केवल 1 ही दर से Tax लगेगाजिसकी वजह से इस Tax पर Tax लगने की समस्‍या से भी छुटकारा मिल जाएगा।

GST से पहले हमारे देश में कई तरह के Direct  Indirect Taxes लगते थे। सामान्‍यत: लोग इन दोनों तरह के Taxes के बीच अन्‍तर भी नहीं कर पाते। चलिएइन दोनों तरह के Taxes को भी थोड़ा Clarify कर लेते हैं।

DIRECT TAX

Direct Tax वो Tax होता है जिसे जिस व्‍यक्ति पर लगाया जाता हैउसे ही Pay करना होता है। ये एक प्रकार से Individual Tax होता है जिसे किसी Particular Category के व्‍यक्ति को ही Pay करना होता है।

उदाहरण के लिए Income Tax एक प्रकार का Direct Tax है क्‍योंकि ये Tax केवल उसी व्‍यक्ति को Pay करना हैजो कि किसी Particular Income Tax Slab में आता है। यदि व्‍यक्ति की सालाना कुल आय 2.5 लाख से कम हैतो वो No Tax Slab में होता हैजबकि यदि किसी व्‍यक्ति की सालाना आय 10 लाख से ज्‍यादा हैतो वो कम से कम 20% के Tax Slab में होता है और केवल उसी व्‍यक्ति को Tax Pay करना पडता है।

Income Tax की तरह ही कई और तरह के Direct Tax भी होते हैं। जैसे Agriculture Tax, Business Tax, Wealth Tax, Municipal Tax, Land Revenue Tax, Capital Gain Tax, Gift Tax

INDIRECT TAX

Indirect Tax वो Tax होता है जिसे किसी एक व्‍यक्ति पर नहीं लगाया जाता और अक्‍सर इस तरह का Tax सभी लोगों को Pay करना होता हैफिर इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह Tax प्रधानमंत्री है या भिखारी और GST एक इसी प्रकार का Indirect Tax हैजिसे एक भिखारी भी Pay करेगा क्‍योंकि उसे पता ही नहीं चलेगा कि उसने भी Tax Pay किया है।

हमारे देश में आज भी 99% लोगों को यही लगता है कि Tax तो केवल अमीर लोग ही Pay करते हैं। वास्‍तव में अमीर लोग किसी भिखारी से केवल एक ही Tax Extra Pay करते हैं और वो होता है Income Tax, और Income Tax के अलावा हर वो Tax एक भिखारी भी Pay करता हैजो Ambani, Adani, Tendulkar और Dhoni करते हैं।

Indirect Tax ही किसी भी सरकार का सबसे बडा Revenue Source होता है और जब भी सरकार अपने खर्चो में थोड़ा तंगी महसूस करती हैवह Indirect Tax बढ़ा देती है। इसी वजह से 2014 में NDA Government बनने से पहले तक जो Service Tax 12% था, GST के आने तक वही Tax तीन सालों में बढ़ते-बढते 15% हो गया और GST के साथ अब वही Service Tax 18% की Category में चला गया है।

GST से पहले तक Indirect Taxes के रूप में Excise Tax, Custom Tax, Services Tax, Market Tax, VAT, Entertainment Tax, Sales Tax  Stamp Duty Tax के रूप में कई Taxes थे। लेकिन GST लागू होने के बाद इनमें से कई Taxes GST के अन्‍तर्गत ही Combined हो गए हैं।


WHY GST?

GST से पहले तक भारत Tax Structure बहुत Complex था। जहां भारतीय संविधान के अनुसार मुख्‍य रूप से वस्‍तुओं की Selling पर Tax लगाने का अधिकार राज्य सरकार के पास था और वस्‍तुओं के Manufacturing व विभिन्‍न प्रकार की Services Tax लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास था। 

इसी वजह से जब किसी राज्‍य सरकार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता थातो वो वह अपने राज्‍य में विभिन्‍न प्रकार के Products की Selling पर नए तरह का Tax लगा देता था और जब केन्‍द्र सरकार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता थातो वह अपने विभिन्‍न राज्‍यों में Manufacture होने वाले विभिन्‍न प्रकार के Products की Manufacturing  Services पर नए तरह का Tax लगा देता था। इसी वजह से 2014 से 2017 तक Service Tax बढ़कर 12 से 15% हो गया क्‍योंकि कहीं न कहीं केंद्र सरकार ने पिछले 3 सालों में कई बार और कई तरह के Tax बढाए हैं।

एक ही देश में दो अलग तरह प्रकार के Tax Systems की वजह से GST से पहले तक देश की Tax व्‍यवस्‍था काफी जटिल थी। इसी वजह से Companies व छोटे व्यवसायों के लिए विभिन्‍न प्रकार के Tax क़ानूनों का पालन करना काफी मुश्किल था। यहां तक कि जब भी कोई विदेशी कम्‍पनी भारत में Investment करना चाहती थीतो यहां के Complex Tax Structure की वजह से उसे भारत में Investment करने में बहुत दिक्‍कत आती थी और यह भी एक कारण था कि NDA सरकार के पिछले 3 सालों के अथक प्रयासों के बावजूद भी भारत में उतना Foreign  Investment नहीं आयाजितना आना चाहिए था। क्‍योंकि Foreign Companies को यही समझ में नहीं आता था कि किस राज्‍य में Invest करने के लिए उन्‍हें केन्‍द्र को कौन-कौन से Tax चुकाने होंगे और राज्‍यों को कौन से Tax चुकाने होंगे। साथ ही किस Tax के लिए किस व्‍यक्ति से या किस बाबू से मिलना होगा।

इसीलिए आपने सुना होगा कि ज्‍यादातर Foreign Investor यही कहते थे कि भारत में Business करना आसान नहीं है और वे अक्‍सर Ease of doing Business का माहौल बनाने पर जोर देते थे। जिसका सीधा सा मतलब यही था कि Foreign Investment को आने के लिए Tax System को आसान बनाईए।

अब GST के रूप में केवल एक Indirect Tax होने की वजह से किसी भी नए Business करने वाले व्‍यक्ति को पता रहेगा कि उसे कितनाकैसा और कैसे Tax Pay करना है। परिणामस्‍वरूप अब Foreign Investment आने के रास्‍ते ज्‍यादा आसान होंगे और उम्‍मीद है कि अब किसी भी अन्‍य देश की तुलना में भारत में ज्‍यादा Foreign Investment आएगाजिससे देश का विकास और ज्‍यादा तेजी से होगा।

Complete GST को एक Post में Cover करना किसी भी स्थिति में पूरी तरह से सम्‍भव नहीं है। इसलिए इस पर कुछ और Posts और निकट भविष्‍य में Publish होंगे। उम्‍मीद है। ये Post आपके लिए उपयोगी रहा होगा। आप चाहें तो इसे अपने Friends and Followers के साथ Share भी कर सकते हैं।



Proper Setting of Tally Erp9 Accounting, Inventory and Taxation Features



टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां